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मोहनदास करमचंद गांधी
420 quotes
“राष्ट्र के विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में नहीं, अन्य भाषा में शिक्षा पाते हैं तो वे आत्महत्या करते हैं। इससे उनका जन्मसिद्ध अधिकार छिन जाता है। विदेशी भाषा से बच्चों पर बेजा जोर पड़ता है और उनकी सारी मौलिकता नष्ट हो जाती है। इसलिए किसी विदेशी भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाना मैं राष्ट्र का बड़ा दुर्भाग्य मानता हूँ।”
मोहनदास करमचंद गांधी (1869–1948) said by 1948 at the latest wikiquote:hi, CC BY-SA 4.0 source
“हिन्दी भाषा का प्रश्न स्वराज्य का प्रश्न है।”
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“अखिल भारत के परस्पर व्यवहार के लिए ऐसी भाषा की आवश्यकता है जिसे जनता का अधिकतम भाग पहले से ही जानता-समझता है। और हिन्दी इस दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ है।”
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“राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है।”
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“अपना शरीर, भोजन और पानी के साथ-साथ अपने आसपास के स्थानों को भी साफ़ रखें।”
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“भगवान के बाद सफाई ही सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।”
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“जिसमे सफाई नहीं, उसके साथ कोई नहीं रहना चाहता।”
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“स्वच्छता स्वतंत्रता से अधिक ज़रूरी है (स्रोत: हरिजन, महात्मा गांधी, 1947)”
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“सेवा तो मूक होना चाहिए, उसका ढ़िढोरा पीटना चाहिए।”
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“दृश्य ईश्वर क्या है? – ग़रीब की सेवा।”
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“जो सेवा करेंगे उनका पतन नहीं हो सकता है।”
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“मुझे सेवा धर्म प्रिय है।”
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“सेवा का भी मोह हो सकता है। मोह भाव छोड़कर ही सच्ची सेवा की जा सकती है।”
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“संसार में सेवा से बढ़कर मनुष्य को द्रवित करने वाली कोई और चीज़ नहीं है।”
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“स्त्री को अबला कहना उसका अपमान है।”
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“स्त्री अहिंसा मूर्ति है।”
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“स्त्री अगर निर्भय हुई तो उसका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता।”
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“स्त्री साक्षात् त्याग है।”
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“स्त्री पुरुष की ग़ुलाम नहीं बल्कि सहधर्मणि, अर्धनगिनी और मित्र है।”
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“स्त्री-पुरुष एक दूसरे के पूरक है।”
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“किसी भी पुरुष का पर स्त्री से सम्बन्ध जोड़ना पाप है।”
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“भारत के धर्म और संस्कृति को स्त्रीयों ने टिका रखा है।”
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“स्त्री चाहें तो संसार को आनंदमय बना सकती है।”
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“जब तक स्त्री और पुरुष समान अधिकारों में नहीं होते, तब तक स्वतंत्रता अधूरी है (स्रोत: हरिजन, महात्मा गांधी, 1940)”
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“अगर स्वास्थ्य ठीक रखना है तो नियमित और सादा आहार ले और नशीली चीजों से दूर रहे।”
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“शरीर संसार का एक छोटा सा नमूना है।”
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“शरीर का निरोग और दीर्घायु होना विषय-रहित परिणाम है।”
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“स्वस्थ वही है जो बिना थकान के दिन-भर शारीरिक और मानसिक मेहनत कर सके।”
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“शरीर के स्वस्थ होने का मतलब यह है कि मनुष्य की इंद्रिया और मन भी स्वस्थ हो।”
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“अच्छे स्वास्थ्य के लिए ब्रम्हचर्य का पालन बहुत जरुरी है।”
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“हमें यह शरीर इसलिए मिला है कि हम इसे भगवान की सेवा में लगाएं। हमारा यह फर्ज़ है कि हम इसे शुद्ध और स्वस्थ रखें। जब समय आये इसे उसी भांति शुद्ध रूप में लौटा सके।”
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“इसे मै अच्छा संकेत मानता हु कि हरिजन खुद जाग गये है।”
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“केवल जन्म के कारण किसी मनुष्य अछूत नहीं माना जा सकता है।”
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“अछूतो को अल्पमत नहीं माना जा सकता।”
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“हरिजनों को खूब जोश के साथ अपने अंदर सुधार करना चाहिए जिससे किसी को यह कहने का हक़ न रहे कि उसके अंदर यह बुराई है।”
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“ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती।”
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“बिना ज्ञान के सही स्वन्त्रता नहीं मिलती।”
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“ज्ञान ही प्रकाश है। उसके बिना हम एक कदम भी नहीं चल सकते है।”
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“जो ज्ञान केवल दिमाग में ही रह जाता है और हृदय में प्रवेश नहीं नहीं कर पाता है। वह जीवन के अनुभव में व्यर्थ सिद्ध होता है।”
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“सच्चा ज्ञान वही है जो आत्मा को शुद्ध करे और सेवा के योग्य बनाए।”
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“ज्ञान बिना चरित्र के, समाज के लिए एक खतरा बन सकता है।”
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“वे ईसाई हैं, इससे क्या हिन्दुस्तानी नहीं रह और परदेशी बन गये ?”
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“कितने ही नवयुवक शुरु में निर्दोष होते हुए भी झूठी शरम के कारण बुराई में फँस जाते होगे ।”
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“उस आस्था का कोई मूल्य नहीं जिसे आचरण में न लाया जा सके। -- (महात्मा, भाग ५ के पृष्ठ १८०)”
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“अहिंसा एक विज्ञान है। विज्ञान के शब्दकोश में 'असफलता' का कोई स्थान नहीं। -- (महात्मा, भाग ५ के पृष्ठ ८१)”
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“सार्थक कला रचनाकार की प्रसन्नता, समाधान और पवित्रता की गवाह होती है। -- (महात्मा, भाग २ के पृष्ठ ५६)”
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“एक सच्चे कलाकार के लिए सिर्फ वही चेहरा सुंदर होता है जो बाहरी दिखावे से परे, आत्मा की सुंदरता से चमकता है। -- (महात्मा, भाग २ के पृष्ठ १५९)”
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“मनुष्य अक्सर सत्य का सौंदर्य देखने में असफल रहता है, सामान्य व्यक्ति इससे दूर भागता है और इसमें निहित सौंदर्य के प्रति अंधा बना रहता है। -- (महात्मा, भाग ५ के पृष्ठ १८०)”
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“चरित्र और शैक्षणिक सुविधाएँ ही वह पूँजी है जो मातापिता अपने संतान में समान रूप से स्थानांतरित कर सकते हैं। महात्मा, भाग २ के पृष्ठ ३६७)”
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“विश्व के सारे महान धर्म मानवजाति की समानता, भाईचारे और सहिष्णुता का संदेश देते हैं। -- (महात्मा, भाग ३ के पृष्ठ २५७)”
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