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मोहनदास करमचंद गांधी
420 quotes
“चरखा तो लंगड़े की लाठी है।”
मोहनदास करमचंद गांधी (1869–1948) said by 1948 at the latest wikiquote:hi, CC BY-SA 4.0 source
“चरखा अहिंसा का प्रतीक है।”
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“खेती किसान का धड़ है और चरखा हाथ-पैर।”
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“मेरे लिए चरखे से अधिक प्रिय वस्तु कोई नहीं है।”
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“चरित्र की संपत्ति दुनिया की सारी दौलत से बढ़कर है।”
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“चरित्र की रक्षा किसी भी मूल्य पर होनी चाहिए।”
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“चरित्र की सीढ़ी है सदाचरण।”
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“चरित्र जीवन की सबसे मूल्यवान वस्तु है।”
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“वयक्ति के चरित्र से ही राष्ट्र का अंदाजा लगाया जा सकता है।”
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“शिक्षा का उद्देश्य चरित्र-निर्माण होना चाहिए। शिक्षा वही है जिसके द्वारा साहस का विकास हो, गुणों में वृद्धि हो और ऊंचे उदेश्यों के प्रति लगन जागे।”
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“धर्म की परीक्षा दुःख में ही होती है।”
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“जो धर्म सत्य और अहिंसा का विरोधी है, वह धर्म नहीं है।”
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“धर्म तो उत्कृठ श्रद्धा का नाम है।”
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“संकट के समय धर्म ही मनुष्य को उबार सकता है।”
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“धर्म भगवान तक पहुँचने का सेतु है।”
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“धर्महीन मनुष्य बिना पतवार की नाव के समान है।”
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“प्रार्थना जीभ से नहीं होता है, ह्रदय से होता है। जो गूंगे और मूढ़ है, वे भी प्रार्थना कर सकते है।”
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“प्रार्थना धर्म का प्राण और सार है।”
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“प्रार्थना के बिना भीतरी शांति नहीं मिल सकती है।”
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“प्रार्थना अपनी योग्यता और दुर्बलता को स्वीकार करना है।”
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“प्रार्थना आत्मा की खुराक है।”
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“प्रार्थना में असीम शक्ति है।”
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“प्रार्थना याचना करना नहीं है, वह तो आत्मा की पुकार है।”
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“प्रार्थना तभी प्रार्थना है, जब वह अपने आप से निकलती है।”
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“प्रार्थना पश्चाताप का एक चिन्ह है।”
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“मै अपना कोई काम, बिना प्रार्थना किये नहीं करता हु।”
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“प्रार्थना आत्मशुद्धि का सहज और सरल साधन है।”
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“मुझे शांति और सफलता प्रार्थना के द्वारा ही मिली है।”
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“प्रार्थना में तल्लीन हो जाना ही असली उपासना है।”
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“नम्रता से मनुष्य के ऐसे बहुत से काम बन सकते है, जो कठोरता से नहीं होते है।”
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“नम्रता मनुष्य का आभूषण है।”
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“नम्रता अहिंसा का ही हिस्सा है।”
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“नम्रता के पीछे स्वार्थ हो तो वह एक ढोंग है।”
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“पुस्तकों का मूल्य रत्नो से भी अधिक है। क्योकि बाहरी चमक-दमक दिखाते है जबकि पुस्तकें अंतकरण को प्रकाशित है।”
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“कुछ पुस्तकें मेरे जीवन के लिए मार्गदर्शिका बन गई, उनमे से एक एमर्सन की “अंटू डी लॉस्ट” है।”
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“गीता का मेर ऊपर काफी प्रभाव रहा है।”
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“मेरे लिए तुलसी दास की रामायण भक्तिरस का बेस्ट ग्रन्थ है।”
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“जहां प्रेम है वहां परमात्मा है।”
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“जहां प्रेम है, वहां डर का स्थान कहां ?”
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“प्रेम की गंथि से ही जगत बंधा हुआ है।”
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“प्रेम जैसी पवित्र चीज संसार में कोई और नहीं है।”
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“प्रेम बारे में मेरा मानना यह है कि प्रेम फूल से भी कोमल और व्रज से ज्यादा कठोर होता है।”
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“ब्रह्मचर्य का ठीक मतलब ब्रह्म की खोज है और यह खोज इंद्रियों के सम्पूर्ण संयम के बिना असंभव है।”
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“ब्रह्मचर्य भी अन्य व्रतों के समान ही सत्य से निकलता है।”
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“अहिंसा का पूरा पालन ब्रह्मचर्य के बिना नामुमकिन है।”
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“ब्रह्मचर्य का पालन मन, वचन और कर्म से करना चाहिए।”
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“ब्रह्मचारी को जीने के लिए ही खाना चाहिए।”
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“ब्रह्मचर्य जीवन की पहली सीढ़ी है। इसके बिना आदमी शिखर तक नहीं पहुंच सकता है।”
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“माता-पिता कभी संतान का बुरा नहीं चाहते है इसलिए उनके बातो की कद्र करना चाहिए।”
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“माता-पिता की सेवा पुत्र का प्रथम कर्तव्य है।”
मोहनदास करमचंद गांधी (1869–1948) said by 1948 at the latest wikiquote:hi, CC BY-SA 4.0 source