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मोहनदास करमचंद गांधी
420 quotes
“उपवास शारीरिक और आत्मिक शुद्धि के लिए आवश्यक सहयोग है।”
मोहनदास करमचंद गांधी (1869–1948) said by 1948 at the latest wikiquote:hi, CC BY-SA 4.0 source
“अगर भारत को शांतिपूर्ण सच्ची प्रगति करनी है तो पैसे वाले यह समझ ले कि किसानों में ही भारत की आत्मा बसती है।”
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“किसानों का शहर की ओर भागना उसकी असफलता का ढिंढोरा है। ऐसा करके वह न तो घर का रहेगा न घाट का।”
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“किसान देश की रीढ़ की हड्डी है; उसकी उन्नति ही भारत की उन्नति है।”
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“कृषि केवल आजीविका नहीं, एक साधना है, यह धरती माँ से हमारा सीधा संबंध है।”
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“आहार संतुलित और विवेकपूर्ण हो तो शरीर में कोई रोग हो ही नहीं सकता है।”
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“आहार शरीर के लिए है न कि शरीर आहार के लिए।”
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“पशु-पक्षी स्वाद के लिए भोजन नहीं करते है, न ही वे इतना खाते कि पेट फटने लगे। वे भोजन को स्वयं नहीं पकाते है । प्रकृति जैसा देती है वैसे ग्रहण कर लेते है।”
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“संसार में जितने लोग भूख से नहीं मरते उससे ज्यादा लोग अधिक भोजन करने से मरते है।”
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“इंसान की शारीरिक बनावट देखने से यह पता चलता है प्रकृति ने मनुष्य को शाकाहारी बनाया है।”
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“अगर हम आहार विवेकपूर्ण नहीं करेंगे तो हममें और पशु में कोई अंतर नहीं है।”
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“जब तक आहार में स्वाद की प्रधानता रहेगी तब तक उसमे सात्विकता आ ही नहीं सकता है।”
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“आप जो बदलाव दुनिया में देखना चाहते हैं, वह पहले खुद में लाएं।”
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“जहाँ प्रेम है, वहाँ जीवन है।”
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“स्वयं को पाने का सबसे अच्छा तरीका है, खुद को दूसरों की सेवा में खो देना।”
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“हमारे विचार ही हमारे शब्द बनते हैं, हमारे शब्द कर्म बनते हैं, और कर्म ही हमारा भाग्य तय करते हैं।”
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“जो व्यक्ति अपने मन को जीत लेता है, वह दुनिया को जीत सकता है।”
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“मै उच्च शिक्षा उसी को कहूंगा जिसे पाकर इन्सान विनम्र, परोपकारी, सेवाभावी और कार्यतत्पर बन जाय।”
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“क्रन्तिकारी की प्रशंसा मै तभी करूँगा, यदि वह अहिंसक है।”
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“क्रांति तो युगों के बाद आती है और वह मनुष्य को सजग कराने और सुधारने के लिए आती है।”
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“मनुष्य को प्रयत्न करना चाहिए और ईश्वर पर भरोसा रखना चाहिए।”
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“जिसको ईश्वर बचाना चाहता है, उसे कौन मिटा सकता है।”
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“जिस ईश्वर ने अपने लाखों लोगों की सहायता की है, वह क्या तुम्हें छोड़ देगा।”
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“ईश्वर की इस दुनियाँ में कहीं भी सदा रात नहीं रहती है।”
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“जब तक ईश्वर हमारी रक्षा करता है, मारनेवाला कितना भी बलवान हो, हमें मार नहीं सकता।”
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“हम सोते है तब भी ईश्वर हमारी चौकीदारी करता है। फिर हम क्यों डरे?”
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“जो ईश्वर में विश्वास रखता है, वह बीमारी का भी सद्पयोग कर लेता है। वह बीमारी से कभी नहीं हारता है।”
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“जहां प्रेम है, वहीं ईश्वर है।”
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“मै मानवता की सेवा के माध्यम से ही ईश्वर का साक्षात्कार का प्रयास कर रहा हु। क्योकि मै जानता हुं कि ईश्वर न तो स्वर्ग में है और न ही पाताल में है, वह हर किसी के दिल में मौजूद है।”
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“गीता तो रत्नों की खान है।”
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“मन पर निंयत्रण करना सबसे कठिन काम है। इसके लिए उत्तम उपाय गीता का अध्ययन करना है।”
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“अगर मुझे संसार की एक सर्वश्रेष्ठ पुस्तक चुनना हो तो मै गीता को चुनुँगा।”
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“देशभक्ति मनुष्य का पहला गुण है। इसके बिना वह दुनियाँ में सिर उठाकर नहीं चल सकता।”
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“दुनिया में देशभक्तो ने आज़ादी का मार्ग प्रशस्त किया है।”
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“क्रोध से बदले की भावना बढ़ती है और उसके भयंकर परिणाम होते है।”
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“क्रोध पाप का मूल कारण है।”
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“हम जन्तुओ को तो मार डालते है पर अपने सीने में छिपे क्रोध को नहीं मारते, जो सचमुच मारने की चीज़ है।”
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“क्रोध को जीतने में ही सच्ची मर्दानगी है।”
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“क्रोध ख़ुद को तो जलाता ही है आसपास के संबद्ध लोगो भी पीड़ित कर देता है।”
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“क्रोध एक प्रकार का रोग है जिसे क्षणिक पागलपन भी कह सकते है।”
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“क्रोध के बिना मनुष्य देवता के सामान है।”
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“देश के युवक अगर चाहें तो वे बड़े से बड़े सत्कार्य आसानी से सम्पन्न कर सकते है।”
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“युवकों को अपने जोश का उपयोग होश के साथ करना चाहिए।”
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“अगर कोई मनुष्य अपना काम नियमित रूप से नहीं करता है, तो उसे सफ़लता नहीं मिल सकती।”
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“नियमितता सफलता की जननी है।”
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“नियमितता जीवन की एक कसौटी है।”
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“बूंद-बूंद से तालाब इसलिए भरता है क्योकि यह काम नियमित रूप से होता है।”
मोहनदास करमचंद गांधी (1869–1948) said by 1948 at the latest wikiquote:hi, CC BY-SA 4.0 source
“नियमितता के द्वारा मनुष्य बड़े से बड़ा सम्पन्न कर सकता है।”
मोहनदास करमचंद गांधी (1869–1948) said by 1948 at the latest wikiquote:hi, CC BY-SA 4.0 source
“चरखा भारत की आर्थिक आज़ादी का प्रतीक है।”
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“चरखे के बिना दूसरे उद्योग नहीं चल सकते है, वैसे ही जैसे यदि सूरज डूब जाए तो दूसरे ग्रह भी डूब जायेगे।”
मोहनदास करमचंद गांधी (1869–1948) said by 1948 at the latest wikiquote:hi, CC BY-SA 4.0 source